दिल्ली-एनसीआर में कड़ाके की ठंड के बीच दिसंबर में बीते 100 सालों की सर्दी का रिकॉर्ड टूटने की संभावना है.मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह
दिल्ली में न्यूनतम तापमान 4.2 डिग्री सेल्सियस पर पहुंच गया है.मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह
समाचार एजेंसी पीटीआई ने मौसम विभाग के एक अधिकारी के हवाले से बताया कि दिसंबर में इससे पहले केवल 1919, 1929, 1961 और 1997 में औसत तापमान 20 डिग्री से कम रहा है.मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह
उन्होंने कहा, "इस साल गुरुवार तक दिसंबर में औसत तापमान 19.85 डिग्री रहा है. 31 दिसंबर तक इसके 19.15 डिग्री सेल्सियस होने की संभावना है."मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह
अधिकारी ने कहा कि इस साल दिसंबर का महीना 1901 के बाद दूसरा सबसे सर्द दिसंबर का महीना हो सकता है.मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह
उन्होंने बताया कि 1997 में औसत अधिकतम तापमान 17.3 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया था, वहीं 1919 और 1929 में दिसंबर का औसत तापमान 19.8 डिग्री सेल्सियस रहा तो 1962 में यह 20 डिग्री था.मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह
दिल्ली में तापमान के आधिकारिक आंकड़े देने वाली सफ़दरजंग मौसम विज्ञान केंद्र ने 18 दिसंबर को अब तक इस महीने का सबसे कम तापमान रिकॉर्ड किया है.मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह
उसके मुताबिक 18 दिसंबर को 12.2 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया.मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह
पालम मौसम केंद्र ने 25 दिसंबर को 11.4 डिग्री सेल्सियस तापमान रिकॉर्ड किया.मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह
14 दिसंबर से दिल्ली के अधिकांश इलाकों में लगातार 13 'कोल्ड डे' या 13 'कोल्ड स्पेल' रहा.मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह
1992 के बाद दिल्ली में ऐसी सर्दी केवल चार वर्षों 1997, 1998, 2003 और 2014 में पड़ी थी.मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह
मौसम विभाग के मुताबिक 29 दिसंबर तक दिल्ली में सीवियर कोल्ड रहने का अनुमान है.मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह
हालांकि इसके बाद के हफ़्ते में हवा की दिशा में परिवर्तन की वजह से कुछ राहत मिलने की संभावना है.मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह
मौसम विभाग के मुताबिक अगर अधिकतम तापमान 10 डिग्री से कम और सामान्य से 4.5 से 6.5 डिग्री कम हो तो यह कोल्ड डे कहलाता है.मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह
वहीं अगर अधिकतम तापमान सामान्य से 6.5 डिग्री से अधिक कम हो तो इसे सीवियर कोल्ड कहते हैं.मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह
इसके साथ ही मौसम विभाग ने बताया कि 29 दिसंबर तक पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़, और उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों में ठंडे दिनों का दौर बने रहने का अनुमान है.मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह
राजस्थान के कई ज़िलों में तापमान शून्य से नीचे चला गया है. सीकर में गुरुवार को तापमान शून्य से 3 डिग्री नीचे पहुंच गया. वहीं मध्य प्रदेश और बिहार के कुछ हिस्सों में भी ठंडे दिनों का दौर रह सकता है.मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह
न्यूज़ एजेंसी एएनआई के मुताबिक, मध्य प्रदेश और बिहार के कुछ इलाकों में इस दौरान पाला गिरने की संभावना भी है.मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह
यही नहीं उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, छत्तीसगढ़, दिल्ली और उत्तर राजस्थान के कुछ इलाकों में घना कोहरा नज़र आ सकता है.मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह
भारतीय मौसम विभाग ने ऑल इंडिया वेदर बुलेटिन में कहा कि 30 दिसंबर से पश्चिम दबाव एकबार फिर सक्रिय होगा जिसकी वजह से उत्तर-पश्चिम और मध्य भारत के कुछ इलाकों में 31 दिसंबर से पहली जनवरी के बीच ओले पड़ने की आशंका है.मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह
मौसम का पूर्वानुमान जारी करने वाली निजी एजेंसी स्काइमेट वेदर ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि भुवनेश्वर, पूरी, कोलकाता सहित ओडिशा और गंगीय पश्चिम बंगाल में कुछ स्थानों पर बारिश होने की संभावना है.मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह
वहीं अमृतसर, लुधियाना और अलवर सहित पंजाब, हरियाणा और उत्तर राजस्थान के कुछ और इलाके भी शीतलहर की चपेट में आएंगे.मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह
जम्मू में दिन का तापमान 10.8 डिग्री तो श्रीनगर में 8.4 डिग्री रहा. वहीं लेह में तापमान शून्य से 18 डिग्री नीचे रिकॉर्ड किया गया.मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह
उत्तराखंड के भी आठ शहरों में न्यूनतम तापमान दो डिग्री सेल्सियस से नीचे रहा. चमोली के जोशीमठ, कुमाऊं के मुक्तेश्वर में भी तापमान पारा शून्य से नीचे चला गया. हिमाचल के भी कई जगहों पर तापमान शून्य से कम रहा. मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह
Friday, December 27, 2019
Monday, December 9, 2019
दिल्ली अग्निकांड: आग, धुंआ, झुलसे जिस्म और मौत के सवाल
दिल्ली के रानी झांसी रोड स्थित अनाज मंडी की उस इमारत में जब आग लगी, भीतर सौ से ज़्यादा लोग सो रहे थे.
रविवार सुबह तो हुई लेकिन तब तक ज़िंदगियां राख हो चुकी थीं. दिन चढ़ने के साथ-साथ लाशों की गिनती बढ़ती गई.
इस इमारत में सो रहे सौ लोगों में से 43 लोग अब तक मर चुके हैं. 60 से ज़्यादा अस्पताल में भर्ती हैं.
घटना सुबह क़रीब पांच बजे की है. सबकुछ रोज़ जैसा था लेकिन वो इमारत आज रोज़ से अलग धुंआ फेंक रही थी. काला धुंआ.
वहां आग की लपटें उठ रही थीं. अंदर से चीखने-चिल्लाने की आवाज़ आ रही थी. कुछ लोग बदहवास से बाहर भाग रहे थे.
लोगों को ज़िंदा निकालने की कवायद शुरू हुई. पर अंदर कुछ ज़िंदा लोग लाश बन चुके थे. लाशों की कोई पहचान नहीं थी. उन्हें कोई जानता नहीं था. उनकी सिर्फ़ यही पहचान थी कि वो इस फैक्ट्री में काम करते थे. शायद रहते भी यहीं थे.
वो फैक्ट्री जहां बच्चों के खिलौने और बस्ते बनते थे.
घटनास्थल पर दमकल की गाड़ियां, पुलिस और एनडीआरएफ़ के जवान तैनात थे. मीडिया भी थी. दर्जनों कैमरे थे लेकिन वहां वो लोग मौजूद नहीं थे जिनके रिश्तेदारों की मौत इस हादसे में हुई.
इस फैक्ट्री में 17 साल से लेकर 30 साल तक की उम्र के लोग काम करते थे. जो बच गए हैं दिल्ली के अस्पताल में भर्ती हैं.
फैक्ट्री के मालिक रेहान और मैनेजर को पुलिस ने हिरासत में ले लिया है और मामले की जांच चल रही है.
उन पर भारतीय दंड संहिता की धारा 304 (लापरवाही से मौत या ग़ैरइरादतन हत्या) के तहत मामला दर्ज किया गया है.
लेकिन यह पहला मौक़ा नहीं है जब देश की राजधानी में इंसानी जान जलकर ख़ाक़ हुई है.
उपहार कांड हो या इसी साल करोलबाग़ के एक होटल में लगी आग. बवाना औद्योगिक क्षेत्र में हुआ हादसा हो या फिर मालवीय नगर केमिकल फैक्ट्री में लगी आग.
सभी घटनाएं एक-दूसरे से मिलती-जुलती हैं. तंग गलियां, लटकते तार, बंद कोठरियों में चलती फैक्ट्री.
चूक कहां. ज़िम्मेदार कौन ?
डीडीए के पूर्व प्लानिंग कमिश्नर ए के जैन से हमने इस बारे में बात की.
डीडीए के पूर्व प्लानिंग कमिश्नर ए के जैन का मानना है कि इस अग्निकांड के लिए तीन लोग/संस्था ज़िम्मेदार हैं. पहला तो वो शख़्स जिसकी ये फैक्ट्री थी क्योंकि उसने बिना किसी एनओसी के वहां फैक्ट्री खोल रखी थी. बिना लाइसेंस के आख़िर उसने फैक्ट्री खोलने की हिम्मत कैसे की.
- नगर निगम ?
हालांकि उन्हें गिरफ़्तार कर लिया गया है. दूसरी ज़िम्मेदारी दिल्ली नगर निगम की है. आख़िर कैसे ये बिल्डिंग उनकी आंखों से बच गई. क्यों उन्होंने इसकी पड़ताल नहीं की और तीसरी ग़लती है फ़ायर डिपार्टमेंट की.
- फ़ायर डिपार्टमेंट?
फ़ायर डिपार्टमेंट के नियमों के अनुसार अगर कोई इमारत 11 मीटर से ऊंची है तो उसे एनओसी लेना होगा और अगर कोई बिल्डिंग पंद्रह मीटर से ऊंची है तो उसे फ़ायर का एनओसी लेना होगा. और अगर उस इमारत के लिए फ़ायर एनओसी नहीं लिया गया है तो डिपार्टमेंट ख़ुद ही उनके ख़िलाफ़ कार्रवाई करते हुए इमारत को सील कर सकता था.
जैन कहते हैं कि जहां तक बात है इमारत बनने के दौरान के सुरक्षा नियमों के पालन की तो ऐसा माना जा रहा है कि यह इमारत पुरानी रही होगी.
वो कहते हैं कि जब दिल्ली का मास्टर प्लान बना था तो उसी वक़्त यह तय कर लिया गया था कि स्ट्रक्चरल सेफ्टी और फ़ायर सेफ़्टी के सर्टिफिकेट हर कोई पेश करेगा ताकि उनकी इमारत रेगुलराइज़ हो सके लेकिन ज़्यादातर लोगों ने इसमें धांधली की. और जितने भी इससे जुड़े विभाग थे उन्होंने भी इसे अनदेखा किया.
जैन इन सारे मामलों में राजनीतिक हस्तक्षेप से भी इनक़ार नहीं करते हैं.
वो कहते हैं कि प्लानिंग के कुछ अपने कायदे हैं लेकिन उनका भी पालन नहीं हुआ. मसलन 6 मीटर चौड़ी सड़क होनी चाहिए. पार्किंग की व्यवस्था होनी चाहिए जो गलियों से बाहर हो ताकि अगर इस तरह की कोई अप्रिय घटना होती है तो सहायता जल्दी पहुंच सके और बीच सड़क खड़ी गाड़ियों की वजह से जाम ना लगे.
इसके अलावा वहां फ़ायर हाइड्रेंट की व्यवस्था होनी चाहिए. लेकिन जहां यह हादसा हुआ वहां इनमें से कोई सुविधा नहीं थी. ये सीधे तौर पर अनदेखी किये जाने का परिणाम है. सबकुछ सामने था,सबको ये भी पता था कि ग़लत हो रहा है लेकिन किसी ने ध्यान नहीं दिया.
रविवार सुबह तो हुई लेकिन तब तक ज़िंदगियां राख हो चुकी थीं. दिन चढ़ने के साथ-साथ लाशों की गिनती बढ़ती गई.
इस इमारत में सो रहे सौ लोगों में से 43 लोग अब तक मर चुके हैं. 60 से ज़्यादा अस्पताल में भर्ती हैं.
घटना सुबह क़रीब पांच बजे की है. सबकुछ रोज़ जैसा था लेकिन वो इमारत आज रोज़ से अलग धुंआ फेंक रही थी. काला धुंआ.
वहां आग की लपटें उठ रही थीं. अंदर से चीखने-चिल्लाने की आवाज़ आ रही थी. कुछ लोग बदहवास से बाहर भाग रहे थे.
लोगों को ज़िंदा निकालने की कवायद शुरू हुई. पर अंदर कुछ ज़िंदा लोग लाश बन चुके थे. लाशों की कोई पहचान नहीं थी. उन्हें कोई जानता नहीं था. उनकी सिर्फ़ यही पहचान थी कि वो इस फैक्ट्री में काम करते थे. शायद रहते भी यहीं थे.
वो फैक्ट्री जहां बच्चों के खिलौने और बस्ते बनते थे.
घटनास्थल पर दमकल की गाड़ियां, पुलिस और एनडीआरएफ़ के जवान तैनात थे. मीडिया भी थी. दर्जनों कैमरे थे लेकिन वहां वो लोग मौजूद नहीं थे जिनके रिश्तेदारों की मौत इस हादसे में हुई.
इस फैक्ट्री में 17 साल से लेकर 30 साल तक की उम्र के लोग काम करते थे. जो बच गए हैं दिल्ली के अस्पताल में भर्ती हैं.
फैक्ट्री के मालिक रेहान और मैनेजर को पुलिस ने हिरासत में ले लिया है और मामले की जांच चल रही है.
उन पर भारतीय दंड संहिता की धारा 304 (लापरवाही से मौत या ग़ैरइरादतन हत्या) के तहत मामला दर्ज किया गया है.
लेकिन यह पहला मौक़ा नहीं है जब देश की राजधानी में इंसानी जान जलकर ख़ाक़ हुई है.
उपहार कांड हो या इसी साल करोलबाग़ के एक होटल में लगी आग. बवाना औद्योगिक क्षेत्र में हुआ हादसा हो या फिर मालवीय नगर केमिकल फैक्ट्री में लगी आग.
सभी घटनाएं एक-दूसरे से मिलती-जुलती हैं. तंग गलियां, लटकते तार, बंद कोठरियों में चलती फैक्ट्री.
चूक कहां. ज़िम्मेदार कौन ?
डीडीए के पूर्व प्लानिंग कमिश्नर ए के जैन से हमने इस बारे में बात की.
डीडीए के पूर्व प्लानिंग कमिश्नर ए के जैन का मानना है कि इस अग्निकांड के लिए तीन लोग/संस्था ज़िम्मेदार हैं. पहला तो वो शख़्स जिसकी ये फैक्ट्री थी क्योंकि उसने बिना किसी एनओसी के वहां फैक्ट्री खोल रखी थी. बिना लाइसेंस के आख़िर उसने फैक्ट्री खोलने की हिम्मत कैसे की.
- नगर निगम ?
हालांकि उन्हें गिरफ़्तार कर लिया गया है. दूसरी ज़िम्मेदारी दिल्ली नगर निगम की है. आख़िर कैसे ये बिल्डिंग उनकी आंखों से बच गई. क्यों उन्होंने इसकी पड़ताल नहीं की और तीसरी ग़लती है फ़ायर डिपार्टमेंट की.
- फ़ायर डिपार्टमेंट?
फ़ायर डिपार्टमेंट के नियमों के अनुसार अगर कोई इमारत 11 मीटर से ऊंची है तो उसे एनओसी लेना होगा और अगर कोई बिल्डिंग पंद्रह मीटर से ऊंची है तो उसे फ़ायर का एनओसी लेना होगा. और अगर उस इमारत के लिए फ़ायर एनओसी नहीं लिया गया है तो डिपार्टमेंट ख़ुद ही उनके ख़िलाफ़ कार्रवाई करते हुए इमारत को सील कर सकता था.
जैन कहते हैं कि जहां तक बात है इमारत बनने के दौरान के सुरक्षा नियमों के पालन की तो ऐसा माना जा रहा है कि यह इमारत पुरानी रही होगी.
वो कहते हैं कि जब दिल्ली का मास्टर प्लान बना था तो उसी वक़्त यह तय कर लिया गया था कि स्ट्रक्चरल सेफ्टी और फ़ायर सेफ़्टी के सर्टिफिकेट हर कोई पेश करेगा ताकि उनकी इमारत रेगुलराइज़ हो सके लेकिन ज़्यादातर लोगों ने इसमें धांधली की. और जितने भी इससे जुड़े विभाग थे उन्होंने भी इसे अनदेखा किया.
जैन इन सारे मामलों में राजनीतिक हस्तक्षेप से भी इनक़ार नहीं करते हैं.
वो कहते हैं कि प्लानिंग के कुछ अपने कायदे हैं लेकिन उनका भी पालन नहीं हुआ. मसलन 6 मीटर चौड़ी सड़क होनी चाहिए. पार्किंग की व्यवस्था होनी चाहिए जो गलियों से बाहर हो ताकि अगर इस तरह की कोई अप्रिय घटना होती है तो सहायता जल्दी पहुंच सके और बीच सड़क खड़ी गाड़ियों की वजह से जाम ना लगे.
इसके अलावा वहां फ़ायर हाइड्रेंट की व्यवस्था होनी चाहिए. लेकिन जहां यह हादसा हुआ वहां इनमें से कोई सुविधा नहीं थी. ये सीधे तौर पर अनदेखी किये जाने का परिणाम है. सबकुछ सामने था,सबको ये भी पता था कि ग़लत हो रहा है लेकिन किसी ने ध्यान नहीं दिया.
Tuesday, December 3, 2019
सारकेगुडा फर्ज़ी मुठभेड़: रिपोर्ट के बाद अब होगी कार्रवाई
छत्तीसगढ़ के बीजापुर ज़िले के सारकेगुड़ा की रहने वाली मड़कम रत्ना बहुत धीरे-धीरे बात करती हैं.
सात साल पहले की घटना को कुरेदने पर वो जैसे अतीत में लौट जाती हैं, "मेरा भाई मड़कम रामविलास 15 साल का था. दौड़ने में उसका कोई मुकाबला नहीं था. गांव की पगडंडियों पर ऐसे दौड़ता था जैसे उड़ रहा हो."
रत्ना अपने भाई को याद करके बताती हैं कि कैसे उसका भाई गर्मी की छुट्टियों में भी पढ़ाई करता रहता था और स्कूल में सबसे अधिक नंबर लाता था.
वे कहती हैं, "पढ़ने-लिखने में ब्रिलियेंट था वो. वकील बनना चाहता था. लेकिन पुलिस ने मेरे भाई को मार डाला."
मड़कम रत्ना छत्तीसगढ़ के बीजापुर ज़िले के उन लोगों में शामिल हैं, जिनके परिजन 28-29 जून 2012 की रात सीआरपीएफ़ और सुरक्षाबलों के हमले में मारे गये थे.
सरकार ने उस समय दावा किया था कि बीजापुर में सुरक्षाबल के जवानों ने एक मुठभेड़ में 17 माओवादियों को मार डाला है. तब केंद्र में यूपीए की सरकार थी और तत्कालीन गृहमंत्री पी चिदंबरम ने इसे बड़ी उपलब्धि माना था.
राज्य के तत्कालीन मुख्यमंत्री रमन सिंह ने इस कथित मुठभेड़ के लिये सुरक्षाबलों की प्रशंसा की थी. उन्होंने दावा किया था कि "मारे जाने वाले सभी लोग माओवादी थे."
लेकिन सोमवार को छत्तीसगढ़ विधानसभा में इस कथित मुठभेड़ को लेकर गठित न्यायिक जांच आयोग की रिपोर्ट पेश की गई, जिसमें कहा गया है कि मारे जाने वाले लोग माओवादी नहीं थे.
जस्टिस वी के अग्रवाल की अध्यक्षता वाली एक सदस्यीय जांच आयोग ने 17 आदिवासियों के मारे जाने की इस घटना को लेकर कहा है कि पुलिस के बयान के विपरित ग्रामीण घने जंगल में नहीं, तीनों गांव से लगे खुले मैदान में बैठक कर रहे थे.
आयोग ने कहा है कि फायरिंग एकतरफ़ा थी, जो केवल सीआरपीएफ और पुलिस द्वारा की गई थी. आयोग ने अपनी रिपोर्ट में इस बात से भी इंकार किया है कि इस घटना में मारे गये लोगों का माओवादियों से कोई संबंध था.
आयोग ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि मृतकों और घायलों के शरीर पर गोली के अलावा चोट के भी निशान हैं, जो मारपीट के कारण हैं और सुरक्षाबलों के अलावा यह कोई और नहीं कर सकता.
कोट्टागुड़ा गांव की कमला काका कहती हैं "न्यायिक आयोग ने अपनी रिपोर्ट में ज़रुर कहा है कि 17 आदिवासियों को पुलिस ने मार डाला लेकिन हमें न्याय तो तभी मिलेगा, जब इस अपराध में शामिल लोगों को सज़ा होगी."
नर्सिंग के पेशे से जुड़ी कमला काका के भतीजे काका राहुल भी इस हमले में मारे गये थे.
कमला काका ने बीबीसी से कहा कि बीजापुर ज़िले के सारकेगुड़ा और सुकमा ज़िले के कोट्टागुड़ा और राजपेंटा गांव के ग्रामीण तीनों गांव से लगे एक खुले मैदान में 'बीज पोंडूम' त्यौहार की तैयारी के लिये बैठे थे, उसी समय सुरक्षाबलों ने चारों तरफ़ से घेर कर गोलीबारी की, जिसमें 7 नाबालिगों समेत 17 लोग मारे गये.
वो कहती हैं, "हम पहले दिन से यह बात कह रहे थे, लेकिन हमें हर जगह झूठा साबित करने की कोशिश की गई. बीज पोंडूम की बैठक के लिये उस रात मेरा भतीजा काका राहुल भी गया था और वह फिर कभी लौट कर नहीं आया."
सात साल पहले की घटना को कुरेदने पर वो जैसे अतीत में लौट जाती हैं, "मेरा भाई मड़कम रामविलास 15 साल का था. दौड़ने में उसका कोई मुकाबला नहीं था. गांव की पगडंडियों पर ऐसे दौड़ता था जैसे उड़ रहा हो."
रत्ना अपने भाई को याद करके बताती हैं कि कैसे उसका भाई गर्मी की छुट्टियों में भी पढ़ाई करता रहता था और स्कूल में सबसे अधिक नंबर लाता था.
वे कहती हैं, "पढ़ने-लिखने में ब्रिलियेंट था वो. वकील बनना चाहता था. लेकिन पुलिस ने मेरे भाई को मार डाला."
मड़कम रत्ना छत्तीसगढ़ के बीजापुर ज़िले के उन लोगों में शामिल हैं, जिनके परिजन 28-29 जून 2012 की रात सीआरपीएफ़ और सुरक्षाबलों के हमले में मारे गये थे.
सरकार ने उस समय दावा किया था कि बीजापुर में सुरक्षाबल के जवानों ने एक मुठभेड़ में 17 माओवादियों को मार डाला है. तब केंद्र में यूपीए की सरकार थी और तत्कालीन गृहमंत्री पी चिदंबरम ने इसे बड़ी उपलब्धि माना था.
राज्य के तत्कालीन मुख्यमंत्री रमन सिंह ने इस कथित मुठभेड़ के लिये सुरक्षाबलों की प्रशंसा की थी. उन्होंने दावा किया था कि "मारे जाने वाले सभी लोग माओवादी थे."
लेकिन सोमवार को छत्तीसगढ़ विधानसभा में इस कथित मुठभेड़ को लेकर गठित न्यायिक जांच आयोग की रिपोर्ट पेश की गई, जिसमें कहा गया है कि मारे जाने वाले लोग माओवादी नहीं थे.
जस्टिस वी के अग्रवाल की अध्यक्षता वाली एक सदस्यीय जांच आयोग ने 17 आदिवासियों के मारे जाने की इस घटना को लेकर कहा है कि पुलिस के बयान के विपरित ग्रामीण घने जंगल में नहीं, तीनों गांव से लगे खुले मैदान में बैठक कर रहे थे.
आयोग ने कहा है कि फायरिंग एकतरफ़ा थी, जो केवल सीआरपीएफ और पुलिस द्वारा की गई थी. आयोग ने अपनी रिपोर्ट में इस बात से भी इंकार किया है कि इस घटना में मारे गये लोगों का माओवादियों से कोई संबंध था.
आयोग ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि मृतकों और घायलों के शरीर पर गोली के अलावा चोट के भी निशान हैं, जो मारपीट के कारण हैं और सुरक्षाबलों के अलावा यह कोई और नहीं कर सकता.
कोट्टागुड़ा गांव की कमला काका कहती हैं "न्यायिक आयोग ने अपनी रिपोर्ट में ज़रुर कहा है कि 17 आदिवासियों को पुलिस ने मार डाला लेकिन हमें न्याय तो तभी मिलेगा, जब इस अपराध में शामिल लोगों को सज़ा होगी."
नर्सिंग के पेशे से जुड़ी कमला काका के भतीजे काका राहुल भी इस हमले में मारे गये थे.
कमला काका ने बीबीसी से कहा कि बीजापुर ज़िले के सारकेगुड़ा और सुकमा ज़िले के कोट्टागुड़ा और राजपेंटा गांव के ग्रामीण तीनों गांव से लगे एक खुले मैदान में 'बीज पोंडूम' त्यौहार की तैयारी के लिये बैठे थे, उसी समय सुरक्षाबलों ने चारों तरफ़ से घेर कर गोलीबारी की, जिसमें 7 नाबालिगों समेत 17 लोग मारे गये.
वो कहती हैं, "हम पहले दिन से यह बात कह रहे थे, लेकिन हमें हर जगह झूठा साबित करने की कोशिश की गई. बीज पोंडूम की बैठक के लिये उस रात मेरा भतीजा काका राहुल भी गया था और वह फिर कभी लौट कर नहीं आया."
Wednesday, November 20, 2019
مساءلة ترامب: محادثة الرئيس الأمريكي مع رئيس أوكرانيا "غير لائقة"
قال مسؤول أمني بارز في البيت الأبيض أمام مجلس النواب الأمريكي ضمن اجراءات مساءلة الرئيس الأمريكي دونالد ترامب تمهيدا لعزله إن المحادثة الهاتفية التي أجراها ترامب ليطلب من أوكرانيا التحقيق مع منافسيه السياسيين كانت "غير لائقة".
وانتقد البيت الأبيض تصريحات، ليفتنانت كولونيل ألكساندر فيندمان، أحد أبرز مسؤوليه في الشأن الأوكراني بعد شهادته في جلسة الاستماع.
وقال فيندمان إن "ترامب حاول الحصول على مطالب سياسية غير لائقة من نظيره الأوكراني في محادثة هاتفية في يوليو/تموز الماضي".
ويسعى التحقيق للتوصل إلى حقيقة ما إذا كان الرئيس قد استغل سلطاته.
وتحقق لجنة مجلس النواب فيما إذا كان ترامب قد حجب المعونات العسكرية الأمريكية عن أوكرانيا للضغط على الرئيس الأوكراني الجديد، فلوديمير زيلينسكي، لإجراء تحقيق فساد مع جو بايدن، منافس ترامب.
وطوال الجلسة، استُخدم الحساب الرسمي للبيت الأبيض على تويتر لمهاجمة فيندمان واجراءات التحقيق.
وسبق أن تعرضت إدارة ترامب لانتقادات شديدة بسبب استخدام حساب تويتر لمهاجمة خصوم سياسيين.
ما الذي قاله فيندمان؟
أدلى كبير الخبراء في الشأن الأوكراني في مجلس الأمن القومي للبيت الأبيض بشهادته قائلا إنه "شعر بالقلق" إزاء طلب ترامب التحقيق في أنشطة بايدن.
وقال فيندمان للجنة "إنه أمر غير لائق. لا يجدر بالرئيس أن يطلب - أن يأمر - بالتحقيق مع خصم سياسي، خاصة أن الطلب وجه لدولة أجنبية وسط شكوك بشأن حيادية ذلك التحقيق".
وأبلغ فيندمان المحامين في مجلس الأمن القومي عن المحادثة "غير اللائقة" نظرا "لإحساسه بالواجب".
ويعد فيندمان أحد المسؤلين الذين استمعوا إلى مكالمة الرئيس الأمريكي ونظيره الأوكراني.
وكان فيندمان، الذي وُلد في أوكرانيا، ضابطا بارزا في حرب العراق. واتخذ والده منذ 40 عاما قرار الهجرة من الاتحاد السوفيتي للعيش في الولايات المتحدة.
من الذين أدلوا بشهادتهم الثلاثاء؟
أدلى في جلسة الثلاثاء شخصان آخران بشهادتهما، وهما جينيفر وليامز، مستشارة الشؤون الخارجية لنائب الرئيس مايك بنس.
وقالت وليامز إن إشارة ترامب إلى بايدن في المحادثة التي جرت يوم 25 يوليو/تموز كانت أمرا "غير اعتيادي" لأنها تطرقت للسياسة الداخلية الأمريكية.
وقالت "بدت الإشارة إلى بايدن سياسية بالنسبة لي".
وشهد في الجلسة أيضا كل من توم موريسون وكيرت فولكر، المبعوث الأمريكي الخاص السابق لأوكرانيا.
وقال فولكر إن ترامب "لديه رأي سلبي عن أوكرانيا مبني على الماضي" وإنه على الرغم من "الأنباء الإيجابية والتذكيات" المنقولة عن الرئيس الأوكراني الجديد، "إلا أنه من الواضح إنه كان يحصل على معلومات من مصادر أخرى، من بينها العمدة جولياني، وكانت هذه المعلومات سلبية وجعلته يحتفظ برأيه السلبي".
وقال موريسون، الذي استقال من منصبه منذ عدة أسابيع، إنه لم يشعر بأي ضغوط للاستقالة ولم يخش أي رد فعل.
وفي تصريحه الافتتاحي قال إنه لا يعرف هوية مسرب المعلومات الذي ساعد تقريره في بدء التحقيق.
وانتقد البيت الأبيض تصريحات، ليفتنانت كولونيل ألكساندر فيندمان، أحد أبرز مسؤوليه في الشأن الأوكراني بعد شهادته في جلسة الاستماع.
وقال فيندمان إن "ترامب حاول الحصول على مطالب سياسية غير لائقة من نظيره الأوكراني في محادثة هاتفية في يوليو/تموز الماضي".
ويسعى التحقيق للتوصل إلى حقيقة ما إذا كان الرئيس قد استغل سلطاته.
وتحقق لجنة مجلس النواب فيما إذا كان ترامب قد حجب المعونات العسكرية الأمريكية عن أوكرانيا للضغط على الرئيس الأوكراني الجديد، فلوديمير زيلينسكي، لإجراء تحقيق فساد مع جو بايدن، منافس ترامب.
وطوال الجلسة، استُخدم الحساب الرسمي للبيت الأبيض على تويتر لمهاجمة فيندمان واجراءات التحقيق.
وسبق أن تعرضت إدارة ترامب لانتقادات شديدة بسبب استخدام حساب تويتر لمهاجمة خصوم سياسيين.
ما الذي قاله فيندمان؟
أدلى كبير الخبراء في الشأن الأوكراني في مجلس الأمن القومي للبيت الأبيض بشهادته قائلا إنه "شعر بالقلق" إزاء طلب ترامب التحقيق في أنشطة بايدن.
وقال فيندمان للجنة "إنه أمر غير لائق. لا يجدر بالرئيس أن يطلب - أن يأمر - بالتحقيق مع خصم سياسي، خاصة أن الطلب وجه لدولة أجنبية وسط شكوك بشأن حيادية ذلك التحقيق".
وأبلغ فيندمان المحامين في مجلس الأمن القومي عن المحادثة "غير اللائقة" نظرا "لإحساسه بالواجب".
ويعد فيندمان أحد المسؤلين الذين استمعوا إلى مكالمة الرئيس الأمريكي ونظيره الأوكراني.
وكان فيندمان، الذي وُلد في أوكرانيا، ضابطا بارزا في حرب العراق. واتخذ والده منذ 40 عاما قرار الهجرة من الاتحاد السوفيتي للعيش في الولايات المتحدة.
من الذين أدلوا بشهادتهم الثلاثاء؟
أدلى في جلسة الثلاثاء شخصان آخران بشهادتهما، وهما جينيفر وليامز، مستشارة الشؤون الخارجية لنائب الرئيس مايك بنس.
وقالت وليامز إن إشارة ترامب إلى بايدن في المحادثة التي جرت يوم 25 يوليو/تموز كانت أمرا "غير اعتيادي" لأنها تطرقت للسياسة الداخلية الأمريكية.
وقالت "بدت الإشارة إلى بايدن سياسية بالنسبة لي".
وشهد في الجلسة أيضا كل من توم موريسون وكيرت فولكر، المبعوث الأمريكي الخاص السابق لأوكرانيا.
وقال فولكر إن ترامب "لديه رأي سلبي عن أوكرانيا مبني على الماضي" وإنه على الرغم من "الأنباء الإيجابية والتذكيات" المنقولة عن الرئيس الأوكراني الجديد، "إلا أنه من الواضح إنه كان يحصل على معلومات من مصادر أخرى، من بينها العمدة جولياني، وكانت هذه المعلومات سلبية وجعلته يحتفظ برأيه السلبي".
وقال موريسون، الذي استقال من منصبه منذ عدة أسابيع، إنه لم يشعر بأي ضغوط للاستقالة ولم يخش أي رد فعل.
وفي تصريحه الافتتاحي قال إنه لا يعرف هوية مسرب المعلومات الذي ساعد تقريره في بدء التحقيق.
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